AYUSH Counselling में Free Exit और Exit with Forfeiture जैसे विकल्प छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। फिर भी बहुत से अभिभावक और छात्र इन दोनों के बीच के फर्क को नहीं समझ पाते।

“सर, मेरी बेटी को Round 2 में एक कॉलेज allot हुआ है, लेकिन हम सोच रहे हैं कि शायद अगला round बेहतर हो। क्या हम report न करें?” यह सवाल एक चिंतित माता-पिता ने मुझसे फोन पर पूछा। उस क्षण मुझे एहसास हुआ कि AYUSH Counselling की इस जटिल प्रक्रिया में कितने ही छात्र और अभिभावक उलझे हुए हैं, जिन्हें पहले चरण में बिना दंड के बाहर निकलने (Free Exit) और बाद के चरणों में सीट छोड़ने की स्थिति में जमा राशि की हानि (Exit with Forfeiture) की सटीक समझ नहीं है।
हर साल सैकड़ों छात्र AYUSH Counselling प्रक्रिया के दौरान exit लेने के फैसले में चूक कर बैठते हैं। कोई जल्दबाज़ी में Round 2 छोड़ देता है, तो कोई बिना पूरी जानकारी के forfeiture का सामना करता है। ऐसा नहीं है कि वे लापरवाह होते हैं, बल्कि वे सिर्फ सही जानकारी के अभाव में उलझन का शिकार हो जाते हैं।
अगर आपको यह न पता हो कि किसी round में report न करने से आपकी eligibility खत्म हो जाएगी, तो आप क्या करेंगे? या फिर यह समझ न हो कि security deposit कब refund होती है और कब जब्त? यही confusion admission decisions को मुश्किल बना देती है।
इस लेख का मकसद है कि आपको AYUSH Counselling के संदर्भ में Free Exit और Exit with Forfeiture की पूरी समझ दी जाए, ताकि आप समय रहते सही निर्णय ले सकें। आइए, एक-एक करके जानते हैं कि ये दोनों विकल्प क्या हैं, इनमें क्या फर्क है, और सही समय पर कौन सा निर्णय लेना सबसे बेहतर होगा।
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AYUSH Counselling में Free Exit क्या होता है?
AYUSH Counselling में Free Exit एक ऐसी व्यवस्था है, जो केवल Round 1 के लिए लागू होती है। इसका अर्थ यह होता है कि यदि किसी छात्र को Round 1 में कोई seat allot होती है और वह उसे join नहीं करना चाहता, तो वह बिना किसी जुर्माने के counselling छोड़ सकता है। इस प्रक्रिया में न तो उसकी security deposit जब्त होती है और न ही वह आगे के rounds (जैसे Round 2, Round 3, SVR) के लिए अयोग्य बनता है। यह व्यवस्था छात्रों को एक सोच-समझकर निर्णय लेने की स्वतंत्रता देती है, खासकर तब जब उन्हें अपनी पसंद का कॉलेज नहीं मिला हो।
क्या आपने कभी सोचा है कि यदि कोई student जल्दबाज़ी में किसी कॉलेज को join कर ले और बाद में पछताए, तो वह decision कितना महंगा पड़ सकता है? Free Exit इसी पछतावे से बचने का अवसर देता है। हालांकि यह विकल्प सिर्फ Round 1 में ही मिलता है, इसलिए समय और जानकारी का सही उपयोग ज़रूरी है।
Free Exit लेने के लिए किसी प्रकार की विशेष प्रक्रिया नहीं होती — यदि आप allotted seat को समय पर report नहीं करते, तो इसे Free Exit माना जाता है। इस स्थिति में आप future rounds में fresh choice filling के साथ भाग ले सकते हैं। कई बार छात्रों को लगता है कि seat reject करने से उनका counselling खत्म हो जाएगा, पर Free Exit की व्यवस्था उन्हें यह सुविधा देती है कि वे दोबारा try कर सकें — बिना किसी नुकसान के।
Exit with Forfeiture क्या होता है और यह क्यों नुकसानदेह है?
Exit with Forfeiture AYUSH Counselling की वह स्थिति है जिसमें छात्र अपनी allotted seat को छोड़ देता है लेकिन Free Exit का समय निकल चुका होता है। इस स्थिति में उसकी security deposit (₹20,000 या ₹50,000) जब्त हो जाती है और वह आगे के कुछ counselling rounds से भी अयोग्य हो सकता है। ये नियम खासतौर पर Round 2, Round 3 और Stray Vacancy Rounds (SVR) पर लागू होते हैं।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें — आपने एक कॉलेज चुना, seat मिली, पर आप उसे join नहीं करते। नतीजा? पैसा भी गया और eligibility भी। Exit with Forfeiture इसी स्थिति को दर्शाता है, जहां decision लेने में गलती छात्रों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि counselling process में seats खाली न जाएं और seriousness बनी रहे। यदि कोई student Round 2 में seat पाकर उसे join नहीं करता, तो उसे forfeiture face करना होगा और वह AACCC की आगे की counselling के लिए अयोग्य हो सकता है।
यह निर्णय तभी लें जब आपके पास कोई मजबूत backup हो — जैसे किसी राज्य की counselling में अच्छा मौका, या आपने किसी technical गलती से गलत choice lock कर दी हो। लेकिन याद रखें, Exit with Forfeiture एक last-resort निर्णय होना चाहिए, न कि बिना सोच-विचार के किया गया कदम।
AYUSH Counselling में Free Exit कब और कैसे लिया जाता है?
Free Exit की सुविधा AYUSH UG Counselling में केवल Round 1 के दौरान ही मिलती है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी student को Round 1 में seat allot होती है और वह allotted college में reporting नहीं करता, तो वह counselling से बाहर नहीं होता। बल्कि वह Round 2, 3 और SVR में fresh choice filling करके भाग ले सकता है और उसकी security deposit भी refund हो जाती है।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें — एक student को Round 1 में उसकी पसंद से कम कॉलेज allot हो गया। वह सोचता है कि अगले round में कुछ बेहतर मिलेगा। ऐसे में Free Exit एक बड़ी राहत है, क्योंकि वह बिना नुकसान के अगले rounds का हिस्सा बन सकता है।
Free Exit का technical implementation भी बहुत सीधा है — अगर आप allotted institute में report नहीं करते, तो system इसे Free Exit मान लेता है। कोई अलग से form या declaration भरने की ज़रूरत नहीं होती।
ध्यान देने वाली बात यह है कि Free Exit सिर्फ Round 1 में मिलता है। यदि आपने Round 2 या आगे के किसी round में seat ली और report नहीं किया, तो यह Free Exit नहीं कहलाएगा — वह Exit with Forfeiture माना जाएगा। इसलिए counselling calendar को ध्यान से पढ़ें और सही समय पर निर्णय लें।
Round 2 में Exit से क्या खतरे हो सकते हैं?
Round 2 AYUSH Counselling का वह critical चरण होता है, जहां से Exit करना सीधा आर्थिक और eligibility loss का कारण बन सकता है। यदि कोई छात्र Round 2 में allotted seat को join नहीं करता, या join करने के बाद resign करता है, तो उसकी security deposit forfeited हो जाती है और वह आगे के AACCC counselling rounds (जैसे Round 3, SVR) के लिए अयोग्य हो जाता है।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें — आपने ₹20,000 या ₹50,000 की deposit दी, और seat मिलते ही उसे छोड़ दिया। क्या यह नुकसान झेलने लायक है? कई बार छात्र जल्दबाज़ी में या गलतफहमी में ऐसा कर बैठते हैं और पूरा academic year बर्बाद कर बैठते हैं।
हालांकि, अगर कोई student Round 2 के final result की घोषणा से 3 दिन पहले तक exit करता है, तो वह forfeiture के बावजूद State Counselling में भाग ले सकता है। लेकिन यह समय-सीमा बहुत सख्त होती है। एक दिन की देरी भी eligibility छीन सकती है।
इसलिए Round 2 के बाद अगर exit करना ज़रूरी लगे, तो counselling schedule का एक-एक दिन नोट करें और formal resignation process समय पर पूरी करें।
Round 3 और Stray Vacancy Round में Exit की अनुमति क्यों नहीं है?
AYUSH Counselling के Round 3 और Stray Vacancy Round (SVR) सबसे अंतिम चरण होते हैं और यहां exit की कोई गुंजाइश नहीं होती। यदि किसी छात्र को इन rounds में seat allot होती है और वह join नहीं करता, तो उसकी security deposit forfeited हो जाती है और वह Central और State दोनों level की counselling से अयोग्य हो जाता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि एक गलत step आपके medical career को एक साल पीछे धकेल सकता है? यही होता है जब कोई student Round 3 या SVR में allotted seat को ignore करता है। यह सिस्टम इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि आखिरी rounds में सिर्फ वही students हिस्सा लें जो serious हैं।
SVR में seat allot होने के बाद join न करना यानी entire AYUSH admission system से बाहर हो जाना। इसलिए इस चरण में choices भरने से पहले 100% clarity होनी चाहिए।
अगर आप unsure हैं, तो SVR में participate ही न करें। लेकिन एक बार participation किया और seat मिली, तो join करना अनिवार्य है। वरना न seat बचेगी, न future counselling की eligibility।
क्या Exit with Forfeiture के बाद भी State Counselling में भाग लिया जा सकता है?
यह सवाल हर साल सैकड़ों छात्रों के मन में आता है। Exit with Forfeiture के बाद भी कुछ स्थितियों में आप State Counselling में भाग ले सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह समय पर resignation और eligibility के नियमों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र Round 2 की seat accept कर लेता है और फिर समय पर resign कर देता है, तो वह forfeiture झेलकर भी State quota counselling में eligible रहता है।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें। अगर आपके पास एक अच्छे राज्य कॉलेज का विकल्प है और आपने Central counselling की seat छोड़ने का निर्णय लिया है, तो सुनिश्चित करें कि resignation निर्धारित समयसीमा में हो।
हालांकि, यदि student ने Round 3 या SVR में seat ली और report नहीं किया, तो वह न केवल forfeiture का सामना करेगा बल्कि अधिकतर राज्यों में उसकी eligibility भी समाप्त हो सकती है। इसीलिए सही समय पर action लेना बहुत ज़रूरी होता है।
इस विषय में हर राज्य की policy थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए राज्य counselling की notification को जरूर पढ़ें। लेकिन मूल सिद्धांत यही है – समय रहते decision लो, वरना मौका निकल जाएगा।
AYUSH Counselling में Exit से जुड़ी सबसे आम गलतफहमियाँ
बहुत से छात्र और अभिभावक AYUSH Counselling में Exit और Forfeiture की concept को लेकर भ्रम में रहते हैं। सबसे आम गलतफहमी यह होती है कि यदि किसी round में seat reject कर दी गई तो counselling में हिस्सा नहीं ले सकते, जबकि Round 1 में Free Exit की पूरी व्यवस्था होती है।
दूसरी बड़ी गलती होती है Round 2 या Round 3 में seat मिलने के बाद report न करना, यह सोचकर कि शायद अगला round मिलेगा। परंतु ऐसा करने से ना केवल security deposit जब्त होती है, बल्कि eligibility भी छिन जाती है।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें। Counselling एक structured process है, जहां हर step documentation, deadline और सही जानकारी पर आधारित होता है। गलती की कोई जगह नहीं होती।
इसके अलावा, कई बार छात्र reporting के बाद resign करना भूल जाते हैं या procedure सही से follow नहीं करते, जिससे उन्हें forfeiture और future disqualification दोनों का सामना करना पड़ता है।
Exit लेने से पहले किन बातों पर ज़रूर गौर करें?
Exit एक गंभीर निर्णय है, खासकर तब जब बात आपकी career और एक academic year की हो। Exit से पहले निम्न बातों पर ज़रूर विचार करें:
- क्या आपके पास कोई बेहतर alternative है? (जैसे State Counselling या Private College)
- क्या आपने सभी counselling rounds का schedule और deadline अच्छी तरह पढ़ा है?
- क्या आपने document verification और reporting नियमों को समझ लिया है?
- क्या forfeiture के बाद आपकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा?
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें। अगर आप केवल इस उम्मीद में exit ले रहे हैं कि शायद आगे कुछ अच्छा मिल जाएगा, तो यह रणनीति गलत भी साबित हो सकती है। बिना स्पष्ट योजना के exit लेना केवल नुकसानदेह ही होता है।
हर स्थिति में अपने counsellor या expert की सलाह लें, ताकि आप informed decision ले सकें और भविष्य में किसी regret से बच सकें।
GLN Admission Advice की सलाह: कैसे करें सही निर्णय?
हमने 16 वर्षों में 3000+ से अधिक छात्रों को counselling decisions में मार्गदर्शन दिया है, और एक बात हर बार सच साबित हुई है – सही समय पर सही जानकारी ही admission को सफल बनाती है।
हमेशा counselling schedule को पढ़ें, deadlines को समझें और प्रत्येक decision से जुड़े फायदे और नुकसान का आकलन करें। Free Exit एक अवसर है, तो Exit with Forfeiture एक चेतावनी।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें। GLN Admission Advice के expert counsellors हर छात्र के profile के अनुसार सही सुझाव देते हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आप बिना किसी अफवाह या डर के confident decision लें।
अगर आप भी अपने admission को लेकर confuse हैं, तो हमारे Experts से Personalised Counselling लें। यह सिर्फ आपके admission का सवाल नहीं, आपके पूरे भविष्य का विषय है।
निष्कर्ष: कब करें Exit और कब नहीं?
AYUSH Counselling में Exit एक विकल्प है, पर इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। यदि आपको Round 1 में अपेक्षा से कम college मिला है और आप आगे के rounds में participate करना चाहते हैं, तो Free Exit लेना समझदारी है। लेकिन Round 2 या आगे के rounds में Exit का मतलब सिर्फ financial loss नहीं, eligibility loss भी हो सकता है।
हर विकल्प पर ठोस तरीके से विचार करें। यदि आप confident हैं कि कोई बेहतर विकल्प मिलेगा, तो Exit पर विचार करें। लेकिन अगर आप unsure हैं, तो allotted seat को accept करना और admission को finalize करना अधिक सुरक्षित होता है।
Exit के हर फैसले को strategy की तरह लें। बिना strategy के लिया गया Exit, एक साल की बर्बादी का कारण बन सकता है।
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अगर आप भी परेशान हैं कि Exit कब लेना चाहिए और कब नहीं – तो आज ही हमसे संपर्क करें। सही जानकारी, सही सलाह और सही समय पर निर्णय ही आपको आपके सपनों के कॉलेज तक पहुंचा सकता है।
Frequently Asked Questions
Q. AYUSH Counselling में Free Exit क्या होता है?
A. Free Exit का मतलब होता है कि अगर किसी छात्र को Round 1 में seat allot होती है और वह report नहीं करता, तो वह बिना किसी penalty के अगले rounds में participate कर सकता है। इसमें security deposit भी refund हो जाती है।
Q. Exit with Forfeiture कब लागू होता है?
A. अगर आप Round 2 या आगे के किसी round में allotted seat को join नहीं करते या resign करते हैं, तो यह Exit with Forfeiture माना जाता है। इसमें आपकी security deposit जब्त हो जाती है और आगे के rounds में आप eligible नहीं रहते।
Q. क्या Round 2 में Exit लेने पर refund मिलेगा?
A. नहीं, Round 2 में allotted seat छोड़ने पर security deposit refund नहीं होती। यह forfeiture की श्रेणी में आता है।
Q. क्या Exit with Forfeiture के बाद State Counselling में हिस्सा लिया जा सकता है?
A. हां, कुछ शर्तों के साथ। यदि आप समय पर resign करते हैं और state counselling की eligibility criteria पूरी करते हैं, तो आप भाग ले सकते हैं। लेकिन Round 3 या SVR में exit लेने पर disqualification हो सकती है।
Q. Round 3 और SVR में Exit की क्या policy है?
A. इन rounds में Exit allowed नहीं होता। यदि seat allot होती है और आप report नहीं करते, तो ना सिर्फ forfeiture होता है बल्कि आप future counselling से भी बाहर हो सकते हैं।
Q. Free Exit लेने के लिए कोई अलग form भरना पड़ता है?
A. नहीं, Free Exit लेने के लिए आपको कोई अलग प्रक्रिया नहीं करनी होती। अगर आप Round 1 में allotted seat पर reporting नहीं करते, तो system इसे स्वतः Free Exit मान लेता है।
Q. Exit लेने से पहले किन बातों पर विचार करना चाहिए?
A. आपके पास बेहतर विकल्प हो, counselling schedule की पूरी समझ हो, forfeiture की स्थिति स्पष्ट हो। इसलिए तभी exit का निर्णय लें। बिना योजना के exit भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
Q. GLN Admission Advice की क्या भूमिका है ऐसे decisions में?
A. हम personalised counselling और verified जानकारी के माध्यम से छात्रों को सही निर्णय लेने में मदद करते हैं, ताकि वह confusion से बचें और confident हों।
