AYUSH Courses उन लाखों छात्रों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है जो NEET में अच्छा स्कोर लाने के बावजूद MBBS में admission नहीं पा सके। “सर, मेरे बेटे ने NEET में 570 मार्क्स लाए हैं, लेकिन MBBS की सरकारी सीट नहीं मिली… प्राइवेट कॉलेज की फीस बहुत ज्यादा है… अब क्या करें?” ऐसे सवाल अब आम हो चुके हैं। हर साल लाखों छात्र MBBS का सपना लेकर NEET देते हैं, लेकिन ज़्यादातर को या तो सरकारी सीट नहीं मिलती या प्राइवेट कॉलेज की फीस उनके बजट से बाहर होती है।

NEET UG 2025 में लगभग 21 लाख छात्रों ने परीक्षा दी, जबकि पंजीकरण की संख्या 23 लाख के आसपास थी। भारत में कुल 1,18,190 MBBS सीटें हैं, जो 780 मेडिकल कॉलेजों में फैली हुई हैं (386 सरकारी और 394 निजी)। इनमें से केवल 55,688 सीटें ही सरकारी हैं। इसका मतलब है कि हर सरकारी सीट के लिए औसतन 38 छात्र प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
अब ज़रा सोचिए — अगर लाखों छात्र इतने संघर्ष के बाद भी MBBS नहीं कर पा रहे, तो क्या medical career का सपना वहीं खत्म हो जाता है? नहीं! इसी मोड़ पर AYUSH courses (BAMS, BHMS, BUMS, BSMS, BNYS) एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आते हैं — कम फीस, सरकारी मान्यता, और वैश्विक संभावनाओं से भरपूर।
AYUSH क्या है और इसमें कौन-कौन से Courses आते हैं?
AYUSH भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक चिकित्सा शिक्षा प्रणाली है, जिसमें पारंपरिक पद्धतियों को modern healthcare approach के साथ जोड़ा गया है। AYUSH का पूरा नाम है — Ayurveda, Yoga & Naturopathy, Unani, Siddha और Homeopathy। यह सभी systems भारत की सांस्कृतिक और चिकित्सा विरासत का हिस्सा हैं और अब structured education model में उपलब्ध हैं।
“सर, BHMS और BAMS भी NEET से होता है क्या?” कई माता-पिता यही सवाल लेकर हमारे पास आते हैं। उत्तर है — हां। NEET में शामिल होकर आप BAMS, BHMS, BUMS, BSMS और BNYS जैसे कोर्सों में प्रवेश पा सकते हैं।
इन कोर्सों की अवधि लगभग 5.5 वर्ष होती है, जिसमें एक वर्ष की अनिवार्य internship शामिल है। Ministry of AYUSH और संबंधित केंद्रीय परिषदों जैसे NCISM, NCH द्वारा इन्हें मान्यता दी जाती है। Admission प्रक्रिया पूरी तरह से merit आधारित होती है और NEET UG के स्कोर के आधार पर होती है।
MBBS न कर पाने के कारण AYUSH एक स्मार्ट विकल्प है
AYUSH courses केवल fallback option नहीं हैं, बल्कि वे एक सशक्त और विवेकपूर्ण विकल्प बन चुके हैं, खासकर तब जब MBBS की सीटें सीमित हों और फीस अधिक।
“सर, ₹1 करोड़ की प्राइवेट MBBS फीस कैसे देंगे?” ये वाक्य हमें हर counselling सीजन में कई बार सुनाई देता है। MBBS की सीमित सरकारी सीटें और निजी कॉलेजों की महंगी फीस के कारण बहुत से प्रतिभाशाली छात्र मेडिकल क्षेत्र से वंचित रह जाते हैं।
ऐसे में BAMS या BHMS जैसे कोर्स कम खर्च में एक सुरक्षित और मान्यता प्राप्त मेडिकल करियर प्रदान करते हैं। सरकारी AYUSH कॉलेजों की फीस ₹10,000 से ₹50,000 प्रतिवर्ष होती है जबकि निजी कॉलेजों में यह ₹1.5 से ₹3 लाख तक होती है।
AYUSH graduates को न केवल सरकारी योजनाओं में अवसर मिलते हैं, बल्कि निजी क्लिनिक, हॉस्पिटल और रिसर्च संस्थानों में भी स्थिर करियर मिलता है। यही कारण है कि आजकल कई छात्र खुद MBBS के बजाय AYUSH चुन रहे हैं।
NEP 2020 के तहत Integrative Medicine का महत्त्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने Integrative Medicine को विशेष रूप से महत्व दिया है। इसका मकसद है कि MBBS और AYUSH दोनों streams को एक-दूसरे के core concepts से परिचित कराया जाए।
“क्या BAMS वाले डॉक्टर भी अब Modern Science पढ़ते हैं?” हां, अब Anatomy, Physiology और Pharmacology जैसे subjects को modern दृष्टिकोण से BAMS curriculum में शामिल किया गया है।
इसके साथ ही MBBS छात्रों को भी आयुर्वेद, पोषण और योग के modules पढ़ाए जा रहे हैं। इससे students का holistic development होता है और patient care अधिक समग्र बनती है।
Integrative approach का यह मतलब है कि अब इलाज केवल बीमारी पर नहीं बल्कि जीवनशैली और preventive health पर केंद्रित होगा — और यही भविष्य की healthcare philosophy है।
WHO की मान्यता और Global Opportunities
AYUSH को अब सिर्फ भारत तक सीमित न मानें। World Health Organization (WHO) ने भारत में Global Centre for Traditional Medicine की स्थापना की है। इससे international level पर AYUSH की credibility में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
“क्या विदेशों में BAMS या BHMS की मांग है?” जी हां। USA, Australia, Germany जैसे देशों में wellness और alternative medicine के बढ़ते चलन के कारण Indian systems की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
अब कई छात्र post-graduation या research के लिए विदेश जाते हैं। साथ ही medical tourism, wellness centers, और e-consultation platforms के ज़रिए international clients तक पहुंचना भी आसान हो गया है।
एक BAMS या BHMS graduate अब ना केवल भारत में practice कर सकता है, बल्कि global healthcare system में भी हिस्सा ले सकता है।
Clinical Training और Internship को मजबूत बनाना
AYUSH courses में अब केवल theoretical learning नहीं, बल्कि clinical practice पर भी खास ज़ोर दिया जा रहा है।
“सर, क्या इन कोर्स में hospital exposure भी मिलता है?” अब मिलता है। NCISM और NCH के नए guidelines के अनुसार, सभी AYUSH colleges में hospital-based training अनिवार्य कर दी गई है।
Students को real-time patient care, diagnosis, और treatment modules के माध्यम से hands-on training दी जाती है। Internship का phase अब structured और monitored होता है, जिससे graduates तैयार रहते हैं clinical challenges का सामना करने के लिए।
Modern Lab और Pharmacology Modules का समावेश
अब BAMS और BHMS जैसे कोर्सों में modern pharmacology, drug testing, और lab-based diagnostics को भी शामिल किया गया है।
“क्या अब आयुर्वेद में भी lab reports की समझ सिखाई जाती है?” बिल्कुल। अब छात्रों को dosage calculation, medicine interaction और pathological test interpretation भी सिखाई जाती है।
Lab exposure और modern medical tools का उपयोग अब syllabus का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जिससे students बेहतर clinical judgment कर सकें।
Entrepreneurship और Career Diversification
AYUSH के क्षेत्र में अब students केवल नौकरी पर निर्भर नहीं, बल्कि खुद का clinic, pharmacy या wellness startup शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं।
“सर, क्या BAMS करके खुद का clinic खोल सकते हैं?” जी हां, और अब तो entrepreneurship modules भी पाठ्यक्रम में शामिल किए जा रहे हैं।
Clinic setup, branding, online consultation, और AYUSH products की manufacturing जैसे विषयों पर अब academic level पर तैयारी करवाई जा रही है।
यह बदलाव छात्रों को job seeker से job creator बनने में मदद कर रहा है।
Interdisciplinary Subjects और Holistic Learning
अब AYUSH पाठ्यक्रम में nutrition, lifestyle medicine, psychology और public health जैसे interdisciplinary विषय भी जोड़े जा रहे हैं।
इससे छात्र केवल एक system-specific doctor नहीं, बल्कि holistic healthcare professional बनते हैं जो patient को सम्पूर्ण रूप से समझते हैं।
यह बदलाव उन्हें जन-स्वास्थ्य और community health programs में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने योग्य बनाता है।
Digital Health और Telemedicine का समावेश
Government of India द्वारा Digital Health Mission और telemedicine को AYUSH education में integrate किया गया है।
“क्या अब online consultation के लिए भी training मिलती है?” हां। छात्रों को telehealth platforms, e-prescriptions और remote monitoring tools की ट्रेनिंग दी जाती है।
यह rural और remote areas में healthcare पहुंचाने में सहायक बनता है और छात्रों को future-ready professional बनाता है।
GLN की विशेषज्ञ सलाह और व्यक्तिगत मार्गदर्शन
अगर आप भी NEET में अच्छी रैंक लाने के बावजूद MBBS में admission नहीं ले पाए हैं और सोच रहे हैं कि अब क्या करें — तो घबराइए नहीं। AYUSH आपके लिए एक मजबूत, सुरक्षित और globally relevant medical career विकल्प हो सकता है।
GLN Admission Advice Pvt. Ltd. पिछले 16 वर्षों से 3000+ छात्रों को सफलतापूर्वक टॉप सरकारी और प्रतिष्ठित कॉलेजों में admission दिला चुका है।
अगर आप भी confused हैं कि BAMS, BHMS, या अन्य AYUSH courses में कैसे और कहां admission लें — तो हमारे expert से personalized counselling पाएं।
यह सेवा Monday–Saturday (11AM–6PM) के बीच उपलब्ध है।
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या AYUSH Counselling Expert से बात करने के लिए कॉल करें: 9289495501
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या BAMS में admission लेने के लिए NEET qualify करना जरूरी है?
हाँ, सभी AYUSH courses में admission NEET UG के माध्यम से ही होता है।
Q2. BAMS और BHMS के बीच क्या अंतर है?
BAMS आयुर्वेद आधारित है जबकि BHMS होम्योपैथी आधारित चिकित्सा प्रणाली है। दोनों की पढ़ाई और career path अलग-अलग होते हैं।
Q3. क्या BAMS करने के बाद सरकारी नौकरी मिल सकती है?
हाँ, कई राज्यों में आयुष चिकित्सक (MO – AYUSH) के रूप में भर्तियाँ होती हैं।
Q4. क्या BAMS या BHMS करने के बाद PG (MD/MS) किया जा सकता है?
हाँ, MD (Ayurveda), MD (Homeopathy), और अन्य PG options उपलब्ध हैं।
Q5. क्या विदेश में BAMS की मान्यता है?
कुछ देशों में मान्यता है, लेकिन practice करने के लिए local licensing आवश्यक होती है।
Q6. क्या BAMS या BHMS छात्र private practice कर सकते हैं?
हाँ, खुद का clinic या wellness center चलाना पूरी तरह वैध और संभव है।
Q7. क्या इन कोर्स में placement मिलता है?
Private hospitals, wellness chains, और research projects में placement के अवसर हैं।
Q8. NEET में कम स्कोर होने पर भी admission मिल सकता है?
हाँ, कम स्कोर पर भी कुछ government colleges में seats मिल जाती हैं। Counselling strategy जरूरी है।
