BAMS, BHMS, BUMS और BSMS — ये AYUSH क्षेत्र के चार प्रमुख कोर्स हैं जो NEET के बाद छात्रों के सामने एक नया विकल्प खोलते हैं। लेकिन इन चारों में से सही कोर्स चुनना केवल रुचि पर नहीं, बल्कि जानकारी, उद्देश्य और करियर विज़न पर भी निर्भर करता है। हर कोर्स एक अलग चिकित्सा प्रणाली, एक अलग दर्शन और एक अलग व्यावसायिक दिशा को दर्शाता है।

अगर आप गहराई से सोचें तो पाएंगे कि BAMS जहां आयुर्वेदिक विज्ञान की गहराई और पंचकर्म पद्धतियों की ओर ले जाता है, वहीं BHMS होम्योपैथी की लक्षण आधारित चिकित्सा पद्धति को सामने रखता है। BUMS यूनानी पद्धति और पारंपरिक हकीमी ज्ञान का संगम है, जबकि BSMS सिद्ध चिकित्सा, योग और हर्बल साइंस का संतुलित मेल प्रस्तुत करता है।
इस ब्लॉग में हम सिर्फ सतही तुलना नहीं करेंगे, बल्कि हर कोर्स की प्रकृति, पढ़ाई, इंटर्नशिप, फीस, नौकरियों और रिसर्च स्कोप को विस्तृत रूप में समझेंगे — ताकि आप सिर्फ कोर्स नहीं, अपना भविष्य चुनें।
यदि आपकी रुचि रोगी की मानसिक स्थिति को समझते हुए इलाज करने में है और आप दवाओं के साथ-साथ काउंसलिंग को भी एक प्रभावी चिकित्सा मानते हैं, तो BHMS आपके लिए BAMS की तुलना में अधिक अनुकूल विकल्प हो सकता है। होम्योपैथी में उपचार लक्षणों पर केंद्रित होता है और इसके दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं। वहीं यदि आप पारंपरिक यूनानी पद्धति, यूनानी दवाओं और उनके सिद्धांतों में रुचि रखते हैं, तो BUMS आपके लिए एक मजबूत करियर विकल्प साबित हो सकता है। यह विशेष रूप से उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जिन्हें अरबी-फारसी भाषा की समझ है और जो यूनानी चिकित्सा की पृष्ठभूमि से आते हैं।
इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको इन चारों कोर्स के बारे में स्पष्ट और गहराई से जानकारी देना है ताकि आप अपने इंटरेस्ट, स्किल और करियर गोल्स के आधार पर सही निर्णय ले सकें। हम कोर्स की पढ़ाई, इंटर्नशिप, फीस, रिसर्च, सरकारी नौकरियों और प्राइवेट प्रैक्टिस की संभावनाओं को समझेंगे।
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BAMS: आयुर्वेदिक चिकित्सा की गहराई को समझना
BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) भारत की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद पर आधारित एक प्रमुख डिग्री कोर्स है। इसमें पंचकर्म, औषधि निर्माण, हर्बल उपचार, और शरीर-विज्ञान को पारंपरिक और आधुनिक दृष्टिकोण से सिखाया जाता है।
- अवधि: 5.5 वर्ष (जिसमें 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप)
- अध्ययन विषय: काय चिकित्सा, शल्य तंत्र, शरीर क्रिया विज्ञान, पंचकर्म, औषध निर्माण
- करियर स्कोप: सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल, क्लिनिक खोलना, रिसर्च, पंचकर्म सेंटर, शिक्षण संस्थान
- प्रमुख संस्थान: BHU, National Institute of Ayurveda, सरकारी व निजी आयुर्वेदिक कॉलेज
BHMS: होम्योपैथी चिकित्सा की प्रभावशीलता
BHMS (Bachelor of Homeopathic Medicine and Surgery) एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जो ‘like cures like’ सिद्धांत पर आधारित है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो कम साइड इफेक्ट वाली, लक्षणों पर केंद्रित और मानसिक स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखने वाली चिकित्सा में विश्वास रखते हैं।
- अवधि: 5.5 वर्ष (1 वर्ष इंटर्नशिप सहित)
- अध्ययन विषय: होम्योपैथिक फार्माकोलॉजी, मटेरिया मेडिका, ऑर्गेनन ऑफ मेडिसिन, रीसर्च मेथडोलॉजी
- करियर स्कोप: होम्योपैथिक प्रैक्टिस, फार्मास्युटिकल कंपनियों, रिसर्च, हेल्थ टेक्नोलॉजी
- प्रमुख संस्थान: NIH कोलकाता, Nehru Homeopathic Medical College, State Govt. Colleges
BUMS: यूनानी चिकित्सा की परंपरा और अवसर
BUMS (Bachelor of Unani Medicine and Surgery) एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है जो ग्रीक और अरब चिकित्सा सिद्धांतों पर आधारित है। यह कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जिन्हें पारंपरिक जड़ी-बूटियों, यूनानी ग्रंथों और हकीमी इलाज की समझ और रुचि है।
- अवधि: 5.5 वर्ष (इंटर्नशिप सहित)
- अध्ययन विषय: मिज़ाज, तिब्बी फार्माकोलॉजी, यूनानी दर्शन, हकीमी औषधियाँ
- करियर स्कोप: हकीम के रूप में प्रैक्टिस, यूनानी डिस्पेंसरी, यूनानी दवा उद्योग, शिक्षण संस्थान
- प्रमुख संस्थान: Jamia Hamdard, Aligarh Muslim University, State Govt. Colleges
BSMS: सिद्ध चिकित्सा की वैज्ञानिकता
BSMS (Bachelor of Siddha Medicine and Surgery) खासतौर पर दक्षिण भारत में प्रचलित है और सिद्ध योग, हर्बल उपचार व जीवनशैली परिवर्तन पर आधारित है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो सिद्ध ग्रंथों में रुचि रखते हैं और हर्बल विज्ञान की गहराई में जाना चाहते हैं।
- अवधि: 5.5 वर्ष (इंटर्नशिप सहित)
- अध्ययन विषय: सिद्ध चिकित्सा सिद्धांत, काय चिकित्सा, योग चिकित्सा, औषधीय रसायन
- करियर स्कोप: सरकारी सिद्धा अस्पताल, सिद्ध मेडिसिन रिसर्च, फार्मा कंपनियाँ
- प्रमुख संस्थान: Govt. Siddha Medical College Chennai, Palayamkottai, National Institute of Siddha
कोर्स की पढ़ाई और क्लीनिकल एक्सपोजर में अंतर
इन सभी कोर्सों में थ्योरी और प्रैक्टिकल का संतुलन होता है लेकिन क्लीनिकल एक्सपोजर की प्रकृति अलग होती है।
- BAMS में पंचकर्म, नाड़ी परीक्षा और हर्बल औषधियों का अभ्यास
- BHMS में केस हिस्ट्री और सिम्पटोमेटिक ट्रीटमेंट पर ज़ोर
- BUMS में यूनानी औषधि निर्माण और हकीमी पद्धति की प्रैक्टिस
- BSMS में योग और शरीर संतुलन आधारित पद्धति का अभ्यास
प्रवेश प्रक्रिया और योग्यता की तुलना
चारों कोर्स के लिए NEET qualification अनिवार्य है, लेकिन कुछ राज्य संस्थान और deemed universities में प्रवेश प्रक्रिया में अंतर हो सकता है।
- योग्यता: NEET में participate करने के साथ-साथ 12वीं में Physics, Chemistry, Biology अनिवार्य
- BAMS/BHMS/BSMS/BUMS: सभी कोर्सों में न्यूनतम 50% अंकों की आवश्यकता (आरक्षित वर्ग के लिए छूट)
- चयन प्रक्रिया: AIQ (15%), State Quota (85%) और Deemed University में AACCC और राज्य काउंसलिंग के माध्यम से
फीस संरचना और स्कॉलरशिप की स्थिति
सरकारी संस्थानों में फीस बहुत कम होती है जबकि प्राइवेट व deemed कॉलेजों में ये ₹2 लाख से ₹4 लाख प्रति वर्ष तक हो सकती है। स्कॉलरशिप योजनाएं सामाजिक श्रेणी, आय और राज्य सरकार की नीतियों पर आधारित होती हैं।
- BAMS: ₹30,000 से ₹4 लाख/वर्ष
- BHMS: ₹20,000 से ₹2.5 लाख/वर्ष
- BUMS: ₹25,000 से ₹3 लाख/वर्ष
- BSMS: ₹20,000 से ₹2 लाख/वर्ष
- स्कॉलरशिप: NSP (National), EWS, SC/ST/OBC राज्य योजनाएं उपलब्ध
रिसर्च, पोस्ट-ग्रेजुएशन और उच्च शिक्षा के अवसर
AYUSH कोर्सेज अब रिसर्च और PG विकल्पों की दृष्टि से भी व्यापक हो चुके हैं।
- BAMS के बाद MD/MS Ayurveda
- BHMS के बाद MD (Homoeopathy)
- BUMS के बाद MD (Unani)
- BSMS के बाद MD (Siddha)
- अन्य विकल्प: MPH, MHA, Clinical Research, PhD, विदेश में Fellowship Programs
सरकारी और प्राइवेट नौकरी के विकल्प
सभी कोर्स के छात्रों के लिए Health Ministry, State AYUSH Departments, आयुष्मान भारत, CGHS, ESIC और प्राइवेट अस्पतालों में नियुक्ति के अवसर हैं।
- BAMS: सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सक, Panchakarma Consultant
- BHMS: सरकारी होम्योपैथिक डॉक्टर, wellness coach
- BUMS: यूनानी विशेषज्ञ, हकीम पदों पर नियुक्ति
- BSMS: सिद्ध क्लिनिक्स, योग चिकित्सक, फूड इंडस्ट्री
विदेश में करियर अवसर और मान्यता
अब भारतीय AYUSH डॉक्टरों की विदेशों में भी मांग है, विशेष रूप से wellness tourism, telemedicine और complementary therapy क्षेत्रों में।
- GCC देशों में Unani और Ayurveda की मान्यता
- यूरोप और USA में BHMS डॉक्टर्स holistic therapy में काम कर सकते हैं
- Australia, Canada में रिसर्च और education roles उपलब्ध
- WHO की पारंपरिक चिकित्सा नीति के कारण AYUSH की Global स्वीकार्यता बढ़ रही है
अगर कोर्स चयन को लेकर उलझन है, तो हम आपकी मदद कर सकते हैं
यदि आप यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि BAMS, BHMS, BUMS या BSMS में से आपके लिए कौन सा कोर्स सबसे बेहतर है, तो GLN Admission Advice Pvt. Ltd. की विशेषज्ञ टीम आपके साथ है। Rajesh Mishra के 16 वर्षों के अनुभव और 3000+ छात्रों के सफल प्रवेश के साथ, हम आपको आपकी रुचि, योग्यता और बजट के अनुसार सबसे सही मार्गदर्शन देंगे। हमारी Free Personalised Counselling सेवा सोमवार से शनिवार (11AM–6PM) के बीच उपलब्ध है।
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Frequently Asked Questions
Q1. क्या BAMS करने के बाद सरकारी नौकरी मिलती है?
हाँ, State और Central Government के तहत आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में नियुक्ति होती है।
Q2. BHMS की degree विदेश में मान्य है क्या?
USA, UK, और कुछ यूरोपीय देशों में BHMS को वैकल्पिक चिकित्सा में मान्यता प्राप्त है।
Q3. BUMS में admission के लिए अरबी-फारसी भाषा अनिवार्य है?
कई संस्थानों में यह एक अतिरिक्त योग्यता मानी जाती है, कुछ जगहों पर अनिवार्य भी हो सकती है।
Q4. BSMS सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित है क्या?
मुख्य रूप से तमिलनाडु और केरल में प्रचलित है, लेकिन अब अन्य राज्यों में भी इसकी पहचान बढ़ रही है।
Q5. क्या सभी कोर्स में internship अनिवार्य होती है?
हाँ, सभी चारों कोर्स में अंतिम वर्ष में 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप होती है।
Q6. क्या AYUSH कोर्सेज AIIMS जैसी संस्थानों में पढ़ाए जाते हैं?
AIIMS में मुख्य रूप से Allopathy पढ़ाई जाती है, लेकिन NIA, NIH जैसे प्रमुख संस्थान AYUSH कोर्स कराते हैं।
Q7. क्या इनमें से किसी कोर्स के बाद UPSC की तैयारी संभव है?
हाँ, ये सभी कोर्स General Graduation की श्रेणी में आते हैं, इसलिए UPSC, State PCS आदि के लिए मान्य हैं।
Q8. क्या GLN Admission Advice की काउंसलिंग सर्विस paid है?
हमारी प्रारंभिक सलाह सेवा निशुल्क है। विस्तृत handholding के लिए structured plans भी उपलब्ध हैं।
